मूत्राशय; जो त्रिदोष संतुलन बनाय रखने ओर शरीर को विषाक्त पदार्थों से मुक्त रखने का प्रमुख केंद्र है

शरीर का एक महतपूर्ण अंग है मूत्राशय , जो की शरीर की शुद्धि ओर संतुलन मे बेहद महतपूर्ण भूमिका निभाता है । आयुर्वेद मे मूत्राशय को ” मूत्राशय धातु ” का हिस्सा माना गया है । जो त्रिदोष संतुलन बनाय रखने ओर शरीर को विषाक्त विषाक्त पदार्थों से मुक्त रखने का प्रमुख केंद्र है। आइए विस्तार से जानते हैं मूत्राशय से जुड़े अद्भुत तथ्य, इसके रोग और घरेलू उपाय।

 मूत्राशय के रोचक तथ्य

  • मूत्राशय पेट के निचले हिस्से (Pelvic Cavity) में स्थित होता है और यह गुर्दों द्वारा बनाए गए मूत्र को अस्थायी रूप से संग्रहित करता है।
  • इसका आकार नाशपाती जैसा होता है और यह 400–600 ml तक मूत्र संग्रहित कर सकता है।
  • मूत्राशय की दीवारें मांसपेशियों से बनी होती हैं, जो मूत्र त्याग के समय सिकुड़कर मूत्र को बाहर निकालती हैं।
  • स्वस्थ मूत्राशय 6–8 घंटे तक मूत्र रोक सकता है।
  • महिलाओं का मूत्राशय पुरुषों की तुलना में छोटा होता है, इसलिए उन्हें बार-बार पेशाब लग सकती है।

 मूत्राशय से जुड़ी प्रमुख बीमारियाँ

  • सिस्टाइटिस (Cystitis) – मूत्राशय की परत में सूजन, अक्सर बैक्टीरियल संक्रमण के कारण।
    लक्षण – बार-बार पेशाब आना, जलन, हल्का दर्द।
  • ब्लैडर स्टोन (Bladder Stone) – मूत्र में मौजूद मिनरल्स के क्रिस्टल बनकर पत्थरी हो जाना।
    लक्षण – पेट दर्द, बार-बार पेशाब, मूत्र में खून।
  • ओवरएक्टिव ब्लैडर (Overactive Bladder) – बार-बार और अचानक पेशाब लगना, नींद में भी व्यवधान।
  • मूत्राशय कैंसर (Bladder Cancer) – दुर्लभ लेकिन गंभीर रोग, जिसमें मूत्र में खून आ सकता है।
  • यूटीआई (Urinary Tract Infection) – यह महिलाओं में अधिक होता है और मूत्राशय तक फैलकर दर्द व जलन का कारण बनता है।

 घरेलू और आयुर्वेदिक उपाय

  • धनिया पानी – एक चम्मच धनिया को पानी में उबालकर पीने से मूत्र संक्रमण और जलन में राहत मिलती है।
  • गोक्षुरा (Tribulus terrestris) – आयुर्वेद में मूत्रविकारों की सर्वश्रेष्ठ औषधि मानी जाती है। यह मूत्र साफ करती है और संक्रमण कम करती है।
  • क्रैनबेरी जूस – प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-बैक्टीरियल गुणों वाला, यह यूटीआई में बेहद फायदेमंद है।
  • गुनगुना पानी – दिनभर पर्याप्त गुनगुना पानी पीना मूत्राशय को डिटॉक्स करता है।
  • हल्दी दूध – हल्दी के एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण मूत्राशय की सूजन को कम करते हैं।
  • आंवला रस – प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है और संक्रमण से बचाता है।
  • नारियल पानी – मूत्र को क्षारीय बनाता है और पेशाब की जलन को तुरंत कम करता है।
  • पलाश के फूल – आयुर्वेद में पलाश के फूल का काढ़ा मूत्र रोगों के लिए कारगर बताया गया है।
  • अदरक और शहद – अदरक का रस शहद के साथ लेने से मूत्राशय की सूजन और दर्द में राहत मिलती है।
  • जीवनशैली – मसालेदार और तैलीय भोजन से बचें, स्वच्छता का ध्यान रखें और मूत्र को लंबे समय तक न रोकें।

आयुर्वेदिक महत्व

आयुर्वेद के अनुसार मूत्राशय अपान वायु का नियंत्रण केंद्र है। यदि अपान वायु असंतुलित होता है तो पेशाब में रुकावट, जलन, बार-बार पेशाब आना और पत्थरी जैसी समस्याएँ होती हैं। गोक्षुरादि गुग्गुलु, वरणादि क्वाथ और पुनर्नवा चूर्ण जैसे आयुर्वेदिक संयोजन मूत्राशय को स्वस्थ रखने में उपयोगी माने जाते हैं।

 निष्कर्ष :- मूत्राशय भले ही शरीर का एक छोटा हिस्सा है, लेकिन यह हमारी सेहत और संतुलन बनाए रखने में अत्यंत अहम भूमिका निभाता है। सही जीवनशैली, आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ और घरेलू उपाय अपनाकर हम मूत्राशय की बीमारियों से बच सकते हैं और इसे जीवनभर स्वस्थ रख सकते हैं।

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