उपवास: आस्था, आत्म-शुद्धि और आयुर्वेदिक संतुलन: उपवास के दौरान क्या खाएं और क्या नहीं

भारत में उपवास केवल एक धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं है, बल्कि यह तन, मन और आत्मा की शुद्धि की एक आध्यात्मिक और वैज्ञानिक विधि भी है। आयुर्वेद में उपवास को ‘लंघन’ कहा जाता है, जिसका अर्थ है पाचक अग्नि को विश्राम देना और शरीर को प्राकृतिक रूप से संतुलित करना। लेकिन उपवास के लाभ तभी प्राप्त होते हैं जब उपवास के दौरान लिया गया आहार सही हो।

उपयोग: उपवास के दौरान शरीर को हाइड्रेटेड और संतुलित रखने में सहायक

प्रश्न: उपवास के दौरान क्या नहीं खाना चाहिए?

आयुर्वेद  के अनुसार उपवास केवल भोजन से परहेज ही नहीं , बल्कि ये शरीर के दोषो जैसे वात -पित -कफ को संतुलित करने का करने का एक तरीका है।  शरीर में जमा हुए आमरस (विषाक्त पदार्थों) को नष्ट करता है और यह जठराग्नि को पुनर्जीवित करता है।

उपवास के दौरान क्या नहीं खाना चाहिए ?

मैदा, बेसन या गेहूँ से बनी चीज़ें साधारण नमक (टेबल सॉल्ट) अधिक मात्रा में तली हुई चीज़ें बासी फल या फ्रिज में रखा खाना बहुत ज़्यादा मिर्च-मसाले या खट्टे खाद्य पदार्थ का परहेज करना चाहिए।

उपवास का सही समय और तरीका:

सुबह-सुबह गुनगुना पानी + नींबू या तुलसी का पानी का प्रयोग कर सकते है ।

साबूदाना: के गुण

गुण :

उपयोग : साबूदाना खिचड़ी या साबूदाना का प्रयोग कर सकते है ।

2. फलाहार या दूध – शरीर को हल्का रखने के लिए
गुण: शीतलता, शक्तिवर्धक, पचाने में आसान

उपयोग :उपवास के दौरान ऊर्जा बनाए रखने के लिए सर्वोत्तम

2. कुट्टू का आटा:
गुण: वात-रोधी, स्वादिष्ट, बलवर्धक
उपयोग: कुट्टू की पूरी या पराठा, खासकर नवरात्रि व्रत के दौरान                                                                                                                  3. सिंघाड़े का आटा:
गुण: शीतलता, वात-कफ निवारक
उपयोग: सिंघाड़े की रोटी, हलवा या चीला
4. मौसमी फल:
गुण: जीवन शक्ति बढ़ाता है, रस प्रदान करता है
उपयोग: केला, सेब, पपीता, अनार और नारियल पानी
5. शकरकंद:
गुण: चिकना, मीठा, बलवर्धक
उपयोग: शकरकंद नमक के साथ उबाला हुआ या घी में पकाया हुआ
6. मूंगफली:
गुण: तृप्तिदायक, पित्त नाशक
उपयोग: मूंगफली के लड्डू, चिवड़ा या भुनी हुई मूंगफली                                                                                                                                7. दूध और दूध से बने उत्पाद (Milk & Dairy):                                                                                                                                           गुण: चिकना, मीठा, शांतिदायक                                                                                                                                                                  उपयोग: दूध, दही, छाछ, पनीर – सीमित मात्रा में                                                                                                                                              8. नींबू और सेंधा नमक:                                                                                                                                                                                  गुण: पाचन में सहायक                                                                                                                                                                                  3. दोपहर में खिचड़ी या सिंघाड़े/कुट्टू की रोटी + दही

4. शाम को नारियल पानी, सूखे मेवे या हर्बल चाय 5. रात में केवल दूध या फल

6. उपवास में आयुर्वेदिक उपचार: रात्रि में त्रिफला चूर्ण लेने से रोग नष्ट होते हैं। गिलोय, तुलसी और अदरक का काढ़ा रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है। आंवला जूस और एलोवेरा का सेवन त्वचा और पाचन दोनों के लिए अच्छा होता है।

उपवास का मानसिक प्रभाव:

आयुर्वेद का मानना है कि भोजन की मात्रा कम करने और इंद्रियों पर नियंत्रण रखने से मानसिक स्थिरता प्राप्त होती है। इसलिए, उपवास को “मन की चिकित्सा” भी कहा जाता है। यह तनाव, चिड़चिड़ापन और अनावश्यक भूख को नियंत्रित करता है।

निष्कर्ष:
उपवास केवल आध्यात्मिक ही नहीं, बल्कि शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य का एक अद्भुत साधन है। यदि आयुर्वेद के अनुसार सही आहार-विहार और दिनचर्या अपनाई जाए, तो उपवास शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है और जठराग्नि को मजबूत करता है। इस श्रावण, नवरात्रि या एकादशी पर उपवास करें, लेकिन सही विधि अपनाकर ही। लाभ।

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