भारत मे एक ऐसा फल पाया जाता है । जिसे अमृत फल कहा जाता है । जहा कुछ विदेशी फल ऐवकाडो ओर ऑरेंज को आधुनिक स्वास्थ का प्रतीक माना गया है । वहीं आयुर्वेदिक दृष्टि से आँवला न केवल उनसे बेहतर बल्कि शरीर का रक्षक भी है। आँवला का नाम संस्कृत में “आमलकी” है, जिसका अर्थ है — शुद्ध, शीतल और आयुर्वर्धक।

पोषण तुलना (Nutrition per 100 g): आँवला बनाम ऑरेंज और एवोकाडो
पोषक तत्व आँवला संतरा (Orange) एवोकाडो (Avocado)
कैलोरी 48 kcal 47 kcal 160 kcal
कार्बोहायड्रेट 10 g 12 g 8.5 g
फाइबर 5 g 2.5 g 6.7 g
प्रोटीन 1 g 1 g 2 g
वसा 0.5 g 0.2 g 14 g
विटामिन C 600–700 mg 50–90 mg 10 mg
कैल्शियम 25 mg 40 mg 12 mg
आयरन 1 mg 0.1 mg 0.6 mg
पोटैशियम 198 mg 181 mg 485 mg

आँवला में विटामिन C की मात्रा संतरे से 10 गुना अधिक और एवोकाडो से लगभग 70 गुना अधिक होती है — यही इसे “सुपरफ्रूट ऑफ इंडिया” बनाता है।

आँवला क्यों है सबसे खास?
1. विटामिन C का राजा

  • 100 ग्राम आँवला में लगभग 700 मिलीग्राम विटामिन C होता है — जो इम्यूनिटी बढ़ाने, स्किन ग्लो और कोलेजन बनाने के लिए चमत्कारी है।
    जहाँ संतरा केवल 50–90 मिलीग्राम देता है, वहीं आँवला एंटीऑक्सीडेंट पॉवरहाउस है।
    आयुर्वेद कहता है —

“आमलकी रसः शीतः, दीर्घायुकरः परः।”
अर्थात् आँवला शीतल, पाचक और आयुर्वर्धक है।

2. कम कैलोरी, ज़्यादा ताकत

  • आँवला में केवल 48 कैलोरी/100 ग्राम होती है, जबकि एवोकाडो में 160 कैलोरी!
    वजन घटाने वालों के लिए यह सबसे उपयुक्त फल है — कम फैट, ज़्यादा फाइबर, ज़ीरो गिल्ट।

3. त्रिदोष संतुलक और रसायन गुणधर्म

  • आयुर्वेद में आँवला को रसायन कहा गया है — यानी ऐसी औषधि जो उम्र, बल और ओज बढ़ाए।
    यह वात, पित्त और कफ तीनों दोषों को संतुलित रखता है।

“त्रिदोषघ्नं च आमलकं।” — चरक संहिता

  • इसका नियमित सेवन शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है, त्वचा चमकदार बनाता है और मानसिक शांति देता है।

4. त्वचा, बाल और आंखों का टॉनिक

  • आँवला में मौजूद फ्लैवोनॉइड्स और फेनोल्स त्वचा को जवां रखते हैं और झुर्रियां घटाते हैं।
    यह बालों की जड़ों को पोषण देता है, झड़ना रोकता है और सफेद बालों को काला करने में मददगार है।
    इसलिए भारतीय नुस्खों में आँवला तेल और आँवला रस का उल्लेख सर्वश्रेष्ठ माना गया है।

5. ब्लड प्यूरीफायर और लिवर क्लेंज़र

  • आँवला रक्त को शुद्ध करता है और लिवर की कार्यप्रणाली को मज़बूत बनाता है।
    यह टॉक्सिन्स बाहर निकालता है और डाइजेशन बेहतर करता है।
    ➡ रोज सुबह आँवला जूस पीना लिवर की सफाई और ब्लड सर्कुलेशन सुधारने का आसान उपाय है।

6. डायबिटीज और हृदय के लिए रक्षक

  • आँवला ब्लड शुगर लेवल नियंत्रित करता है और LDL कोलेस्ट्रॉल घटाता है।
    इसमें मौजूद क्रोमियम और पॉलीफेनॉल्स इंसुलिन रिस्पॉन्स सुधारते हैं, जिससे डायबिटीज कंट्रोल रहता है।

7. पाचन शक्ति का संरक्षक

  • आँवला पेट के लिए शीतल और पाचक है।
    यह अम्लपित्त, कब्ज और गैस जैसी समस्याओं में तुरंत राहत देता है।
    आँवला का रस या मुरब्बा खाने से भोजन का पाचन और पोषण अवशोषण दोनों बेहतर होते हैं।

8. मानसिक स्वास्थ्य में सहायक

  • आँवला तनाव और थकान को कम करने वाला प्राकृतिक एडाप्टोजेन है।
    इसका सेवन मस्तिष्क में ऑक्सीजन प्रवाह बढ़ाता है, जिससे फोकस और स्मृति शक्ति सुधरती है।

 घर पर आँवला के पारंपरिक सेवन के तरीके

1. आँवला जूस:

  • ताजे आँवले का रस निकालकर उसमें थोड़ा शहद मिलाकर सुबह खाली पेट लें।
    ➡ इम्यूनिटी, त्वचा, और लिवर के लिए श्रेष्ठ टॉनिक।

2. आँवला मुरब्बा:

  • आँवले को गुड़ या शहद में डालकर बनाया गया मुरब्बा रोज एक टुकड़ा खाने से त्वचा और रक्तशुद्धि में फायदा होता है।

3. त्रिफला चूर्ण:

  • आँवला, हरड़ और बहेड़ा का मिश्रण — रोज रात सोने से पहले 1 चम्मच गुनगुने पानी से लें।
    ➡ शरीर का डिटॉक्स और पाचन में सुधार।

4. आँवला तेल:

  • बालों में हफ्ते में 2 बार आँवला तेल की मालिश करने से बाल झड़ना और रूखापन दोनों कम होते हैं।

आयुर्वेदिक दृष्टि से आँवला सेवन नियम:

  • सुबह खाली पेट रस या मुरब्बा लेना श्रेष्ठ माना गया है।
  • दूध या गुड़ के साथ इसका सेवन न करें — यह संयोजन पित्त बढ़ा सकता है।
  • अधिक मात्रा में सेवन (10–15 आँवले/दिन) ठंडे प्रकृति वालों को जुकाम दे सकता है।

 निष्कर्ष:

आँवला कोई साधारण फल नहीं — यह एक आयुर्वेदिक वरदान है जो शरीर, मन और आत्मा — तीनों को संतुलित रखता है।
जहाँ विदेशी फल अपनी चमक से लुभाते हैं, वहीं आँवला अपनी सादगी से स्वास्थ्य लौटाता है।
संतरा और एवोकाडो जहाँ सिर्फ पोषण देते हैं, वहीं आँवला आरोग्य और दीर्घायु दोनों का प्रतीक है।

“जो रोज आँवला खाए, वह रोग कभी न पाए।”

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