आज के समय में हर उम्र के लोग कमर दर्द से परेशान रहते है। झा यह समस्या पहले उम्रदराज लोगो में देखि जाती थी। वही अब २०-३० साल के युवा भी इस से परेशान रहते है। आयुर्वेद के अनुसार कमर...
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जहाँ पीड़ा, वहाँ समाधान है – आयुर्वेदिक औषधीय तेल आपकी रक्षा कर सकता है, तो वह है – महानारायण तेल
मानसून आते ही वात और कफ से जुड़ी समस्याएं जैसे जोड़ों का दर्द, स्नायु शिथिलता, मांसपेशियों में जकड़न, सर्दी और थकान आम हो जाती हैं। ऐसे में यदि कोई एक बहुउपयोगी आयुर्वेदिक औषधीय तेल आपकी रक्षा कर सकता है, तो...
द्राक्षासवः आयुर्वेदिक टॉनिक – सेहत का मीठा राज़ , वात और पित्त को संतुलित करता है
द्राक्षासव आयुर्वेद का एक अत्यंत प्रसिद्ध और प्रभावशाली आसव आरिष्ट वर्ग का हर्बल टॉनिक है, जो विशेष रूप से द्राक्षा (अंगूर) से निर्मित होता है। यह एक मधुर और बलवर्धक औषधि है जो विशेष रूप से पाचन, भूख, थकावट, एनीमिया...
बेकिंग सोडा यह सिर्फ पकवानों को फुलाने वाला पाउडर नहीं, बल्कि आपकी सेहत का सस्ता और असरदार साथी भी है।
आपकी रसोई में रखा हुआ सफ़ेद पॉउडर खाने वाला सोडा या बेकिंग सोडा सिर्फ पकवान फूलने के लिए नहीं है , बल्कि यह शरीर , त्वचा और सेहत टी के लिए एक बहुमूलय प्राकृतिक ओषधि भी है ,आधुनिक विज्ञानं इसे...
दलिया: आयर्वेद के अनुसार एक मध्य-गुणकारी आहार है , जो वात, पित्त और कफ तीनों दोषो को संतुलित करने में सहायता करता है।
आज की भाग दौड़ की जिंदगी में स्वास्थवर्ध्क खाने का चुनाव करना जितना मुश्किल हो गया है। उससे मुश्किल हो गया है उसको चुनना। ऐसे में दलिया एक ऐसा सुपर फ़ूड है जो न केवल स्वादिष्ट है बल्कि उतना पोषण...
त्रिमद चूर्ण : तीन जड़ी-बूटियों का संयोजन, स्वास्थ्य की गारंटी
त्रिमद चूर्ण आयुर्वेद का एक क्लासिकल फॉर्मूला है, जो नागरमोथा (Nagarmotha), चित्रक (Chitrak) और विदंग (Vidanga) - इन तीन शक्तिशाली जड़ी-बूटियों के समान अनुपात में मिलाकर तैयार किया जाता है। चाहे आपके पाचन से संबंधित समस्या हो, वात व कफ...
“मेथी—छोटा पैकेट, बड़ा धमाका!” शरीर के कफ, पित्त और वात—तीनों दोषों को संतुलित करने में समर्थ है।
आयुर्वेद में कहा गया है—"यथानाम तथा गुणाः" यानी जिस पदार्थ का नाम जैसा होता है, उसमें वैसे ही गुण होते हैं। ‘मेथी’—छोटा सा बीज, पर गुणों में विशाल। यह हर भारतीय रसोई में पाई जाती है, लेकिन बहुत कम लोग...
गोक्षुर मूत्र विकारों का शुद्ध प्राकृतिक इलाज !गोक्षुरं बलवर्धनं मूत्रकृच्छ्रहरं परम् ।।
गोक्षुर (Tribulus terrestris), एक छोटी काँटेदार बेल है जो भारत के मैदानी क्षेत्रों में विशेष रूप से पाई जाती है। आयुर्वेद में इसे “वृष्य”, “बल्य" और "मूत्रल” गुणों के कारण अत्यंत प्रभावशाली औषधि माना गया है। इसका उपयोग हजारों वर्षों...
धीमा मेटाबॉलिज्म: थकान, चर्बी और सुस्ती का एक ही कारण !
क्या आप बिना ज़्यादा खाए भी वजन बढ़ने, थकान, आलस्य, अपच और स्किन की समस्याओं से परेशान हैं? तो जान लीजिए - इन सबकी जड़ है आपका धीमा मेटाबॉलिज्म (Agni Mandya) । मेटाबॉलिज्म यानी शरीर की ऊर्जा उत्पादन प्रक्रिया। आयुर्वेद...
तुलसी-आयुर्वेद की सर्वोत्तम ओषधि ही नहीं बल्कि हर घर आध्यतम की देवी माता! भी है ।
बारिश का मौसम जैसे ही आता है वातावरण में नमी बढ़ जाती है, जिससे संक्रमण रोग , वायरल फीवर, सर्दी-जुकाम, पेट से संबंधी रोग और स्किन इंफेक्शन जैसे अन्य समस्याएं तेज़ हो जाती हैं। ऐसे में यदि कोई एक जड़ी-बूटी...




