वक़्त हो रहा था सुबह के ठीक 3:00 बजे। सहारनपुर की ठंडक और गहरी खामोशी को चीरते हुए मैंने अपनी गाड़ी का इंजन स्टार्ट किया। मंज़िल थी जयपुर। खुली सड़क थी और मन में था एक अनजाना रोमांच। इस तरह...
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वक़्त हो रहा था सुबह के ठीक 3:00 बजे। सहारनपुर की ठंडक और गहरी खामोशी को चीरते हुए मैंने अपनी गाड़ी का इंजन स्टार्ट किया। मंज़िल थी जयपुर। खुली सड़क थी और मन में था एक अनजाना रोमांच। इस तरह...