आयुर्वेद की परंपरा में चूर्ण योग का विशेष महत्व है। इन चूर्णों में एक ऐसा अद्भुत और कालजयी योग है – तालिसादी चूर्ण। यह न केवल सर्दी-खाँसी जैसी सामान्य समस्याओं में कारगर है बल्कि पाचन, श्वसन तंत्र और रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी मजबूत करता है। आज हम जानते हैं तालिसादी चूर्ण क्या है, यह कैसे बनता है, इसके सेवन के तरीके और इसके अद्भुत लाभ ।
तालिसादी चूर्ण क्या है
तालिसादी चूर्ण एक बहुप्रचलित आयुर्वेदिक औषधि है। यह कई औषधीय जड़ी-बूटियों और मसालों के संयोजन से तैयार किया जाता है। इसका मुख्य आधार तालिसपत्र (Abies webbiana) है, जो श्वसन रोगों में बेहद उपयोगी माना जाता है।
तालिसादी चूर्ण कैसे बनता है
तालिसादी चूर्ण विभिन्न औषधीय द्रव्यों को समान मात्रा में लेकर बनाया जाता है। इसमें मुख्य रूप से शामिल होते हैं-
तालिसपत्र (Abies webbiana )
काली मिर्च
पिप्पली (लंबी मिर्च)
सौंठ (सूखी अदरक)
इलायची
दालचीनी
चिनी या मिश्री
इन सभी को बारीक पीसकर छान लिया जाता है और फिर इसे वायुरोधी पात्र में सुरक्षित रखा जाता है।
तालिसादी चूर्ण के फायदे
1. खाँसी और जुकाम में असरदार: श्वसन तंत्र को साफ करता है और कफ को बाहर निकालता है।
2. अस्थमा और ब्रोंकाइटिस में उपयोगी: श्वसन नलिकाओं को आराम देकर साँस लेने में सुविधा देता है।
3. पाचन शक्ति बढ़ाए: भूख को बढ़ाता है और गैस, अपच जैसी समस्याओं को दूर करता है।
4. बुखार और थकान में लाभकारी : शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है।
5. गले की खराश और स्वरभंग में असरदार : आवाज को मधुर और स्पष्ट बनाता है।
6. इम्यूनिटी बूस्टर: सर्दी-जुकाम की पुनरावृत्ति को कम करता है।
7. बल और ओज बढ़ाने वाला: नियमित सेवन से शरीर को ताकत और ऊर्जा मिलती है।
! सावधानियाँ
तालिसादी चूर्ण का सेवन चिकित्सक की सलाह अनुसार ही करना चाहिए।
अत्यधिक मात्रा में सेवन करने से पित्त वृद्धि या गर्मी बढ़ सकती है।
गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाएँ चिकित्सक से परामर्श लें।
| आयुर्वेदिक दृष्टिकोण
चरक संहिता और भैषज्य रत्नावली जैसे ग्रंथों में तालिसादी चूर्ण को
तालिसादी चूर्ण सेवन के dam (खाँसी), श्वास (अस्थमा), ज्वर (बुखार) और अरुचि (भूख लगना) समस्याओं का उत्तम उपाय बताया गया है। उत्तम विशेषकर
खाँसी या जुकाम में – 2-3 ग्राम तालिसादी चूर्ण शहद के साथ दिन में 2-3 बार ।
पाचन की कमजोरी में गुनगुने पानी या अदरक के रस के साथ।
बुखार या कमजोरी में गिलोय स्वरस या तुलसी काढ़े के साथ।
बच्चों के लिए सेवन मात्रा हमेशा आधी रखी जाती है और चिकित्सक की देखरेख में देना उचित हैं।
यह त्रिदोषहर माना जाता है, विशेषकर कफ और वात दोष को संतुलित करने में सहायक है।
निष्कर्ष
तालिसादी चूर्ण एक ऐसा आयुर्वेदिक खज़ाना है जो न केवल मौसमी बीमारियों में राहत देता है बल्कि शरीर की इम्यूनिटी और ताकत भी बढ़ाता है। यदि इसे सही तरीके और उचित मात्रा में लिया जाए तो यह स्वास्थ्य का रक्षक सिद्ध हो सकता है।




