क्या आईबीएस क्या है ? आज के आधुनिक जीवन शैली की बड़ी समस्या बनती जा रही है । आजकल पेट और पाचन की बीमारिया तेजी से बढ़ती जा रही है । इन्ही में से एक है आईबीएस (Irritable Bowel Syndrome) इन्हीं में से एक है । इसे आम भाषा में “आंतों की चिड़चिड़ाहट” भी कहते हैं। आईबीएस कोई जानलेवा रोग नहीं है, लेकिन यह व्यक्ति के जीवन की गुणवत्ता को गंभीर रूप से प्रभावित करता है। इसमें बार-बार पेट में दर्द, गैस, दस्त या कब्ज़ की समस्या होती रहती है। आधुनिक विज्ञान के अनुसार, आईबीएस का कारण पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। तनाव, अनुचित खानपान, असंतुलित दिनचर्या और कमजोर पाचन इसकी जड़ हैं। लेकिन आयुर्वेद इसे सिर्फ आंतों की समस्या नहीं मानता, बल्कि इसे मन और शरीर दोनों का विकार मानता है।
आयुर्वेद के अनुसार आईबीएस का कारण
आयुर्वेद में इस समस्या को “ग्रहणी दोष” कहा गया है। ‘ग्रहणी’ का कार्य है – भोजन को ठीक से पचाकर शरीर को ऊर्जा देना। जब अग्नि (पाचन शक्ति) कमजोर होती है तो आहार ठीक से पच नहीं पाता। इससे आम (विषैले अवशेष) बनते हैं और धीरे-धीरे आंतों की गति असंतुलित हो जाती है।
प्रमुख कारण आयुर्वेद के अनुसार:
- असमय और अनियमित भोजन
- अधिक तैलीय, मसालेदार और जंक फूड
- चिंता, तनाव और अवसाद
- पाचन अग्नि की कमजोरी
- नींद का अभाव
आईबीएस के लक्षण
- बार-बार दस्त या कब्ज़ होना
- पेट में मरोड़ या दर्द
- भोजन के बाद भारीपन
- गैस और एसिडिटी
- कमजोरी और बेचैनी
- बार-बार शौच की इच्छा
आयुर्वेद मानता है कि आईबीएस सिर्फ शरीर को नहीं, बल्कि मन को भी प्रभावित करता है। यही कारण है कि इस रोग के इलाज में मानसिक शांति और संतुलित जीवनशैली का महत्व विशेष है।
आयुर्वेदिक निदान (इलाज)
आईबीएस का स्थायी इलाज आधुनिक चिकित्सा में सीमित है, लेकिन आयुर्वेद में इसे जड़ से ठीक करने के उपाय बताए गए हैं।
1. आहार चिकित्सा (Pathya-Apathya):
- हल्का, सुपाच्य भोजन लें – मूंग दाल खिचड़ी, दलिया, सूप।
- छाछ में अजवाइन और सैंधा नमक डालकर पिएँ।
- अदरक, सौंफ और जीरे का उपयोग भोजन में करें।
- तैलीय, मसालेदार, ठंडी चीज़ें और जंक फूड से बचें।
2. औषधियाँ और नुस्खे:
- बिल्व (बेल) – इसकी चूर्ण या मुरब्बा दस्त और गैस में लाभकारी।
- अतिविषा – दस्त में अत्यंत उपयोगी औषधि।
- सत इसबगोल – कब्ज़ में राहत देने वाला प्राकृतिक उपाय।
- अदरक और हिंग – पेट दर्द और गैस कम करने में प्रभावी।
- पंचकर्म – विशेष रूप से विरेचन और बस्ती उपचार से आंतों की शुद्धि और पाचन शक्ति की वृद्धि।
3. जीवनशैली:
- रोज़ाना योग और प्राणायाम करें – खासकर पवनमुक्तासन, वज्रासन और अनुलोम-विलोम।
- समय पर भोजन करें और पर्याप्त नींद लें।
- तनाव कम करने के लिए ध्यान और मेडिटेशन करें।
आईबीएस और मन का गहरा संबंध
आयुर्वेद में कहा गया है कि “मनसि विकारे शरीरे विकारः” यानी जब मन में विकार होगा तो शरीर पर भी असर पड़ेगा। इसलिए आईबीएस में मानसिक शांति अत्यंत महत्वपूर्ण है। तनाव कम करना, सकारात्मक सोच और संतुलित जीवनशैली आईबीएस को नियंत्रित करने की सबसे बड़ी दवा है।
घरेलू नुस्खे (Home Remedies for IBS)
- सौंफ और अजवाइन की चाय – पाचन सुधारती है और गैस कम करती है।
- अदरक का रस + शहद – कब्ज़ और दस्त दोनों में संतुलनकारी।
- छाछ में पुदीना – आंतों को ठंडक देता है और एसिडिटी कम करता है।
- इसबगोल + गुनगुना दूध – कब्ज़ को दूर करता है।
- हिंग का पानी – पेट के मरोड़ और फुलाव में लाभकारी।
निष्कर्ष
आईबीएस आधुनिक जीवनशैली की देन है, लेकिन आयुर्वेद हमें बताता है कि यह समस्या सिर्फ आंतों की नहीं बल्कि मन और शरीर के संतुलन की भी है। सही खानपान, आयुर्वेदिक औषधियाँ और तनाव-मुक्त जीवन अपनाकर इसे नियंत्रित और धीरे-धीरे ठीक किया जा सकता है।



